विक्रम बत्रा (Vikram Batra) एक भारतीय सेना अधिकारी थे जिन्होंने कर्गिल युद्ध (1999) के दौरान अपने शौर्य और बहादुरी के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की थी। वह 9 जुलाई, 1999 को कर्गिल सेक्टर में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। उन्हें "शेरशाह" के नाम से भी जाना जाता है।
विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर, 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर जिले में हुआ था। उन्होंने नवोदय विद्यालय, पालमपुर में अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर नवीन सेना नाइकी (NDA) में दाखिल होने के बाद भारतीय सेना में शामिल हो गए। वह गढ़वाल राइफल्स में कप्तान के पद पर सेवानिवृत्त हुए थे।
विक्रम बत्रा की सर्वाधिक प्रसिद्ध कार्रवाई उनके कर्गिल युद्ध के दौरान हुई थी, जब उन्होंने शेरगांव घाटी क्षेत्र में अपने लोगों को खुद की हिफाजत करते हुए बहादुरी और साहस का प्रदर्शन किया। वह दो बार युद्ध साहस दिखाकर पाकिस्तानी सेना के लिए अधिकृत चुने गए और अपने जीवन की कीमत पर विजय प्राप्त की। उन्होंने 7 जुलाई, 1999 को बटालिका ऊर्ध्व तंत्र में अपने साथियों के साथ ज़मीनी ऊचाई पर पहुंचते हुए दुश्मन की सुरक्षा गार्डों को मार गिराया था। हालांकि, उनकी इस जोखिम भरी कार्रवाई में वह घायल हो गए थे और दूसरे दिन उनके परिवार को उनकी मौत की सूचना मिली।
विक्रम बत्रा की शौर्यगाथा और उनकी बहादुरी को देश भर में सराहा जाता है। उन्होंने कर्गिल युद्ध के दौरान दिखाए गए बहादुरी के लिए परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी वीरता और निष्ठा को याद रखते हुए, भारत सरकार ने उनकी याद में भारतीय सेना के बातिलियन का नाम "विक्रम बत्रा" रखा है।
विक्रम बत्रा एक युवा अधिकारी थे जो अपने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तत्पर थे। उनकी कठोर तालिम, दृढ़ निश्चय और अद्भुत साहस ने उन्हें एक साहसिक और प्रभावी सेनानायक बना दिया। विक्रम बत्रा के बलिदान और सेवाभाव ने
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